ब्रह्मश्री वी.एम.सी. संकरन नम्बूदीरीप्पाद

जन्म तिथि:-28 फरवरी, 1918
जन्म स्थान:पालक्कड़, केरल 
व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विवरणश्री वी.एम.सी. संकरन नम्बूदीरीप्पाद का जन्म श्री दमोदरन नम्बूदीरीप्पाद और श्रीमती उमा अंतर्जनम के घर हुआ। उन्होंने अपने पिता को केवल तीन वर्ष की आयु में ही खो दिया। जिस परिवार में वे बड़े हुए, उसकी आयुर्वेद में विशेष रूप से विषचिकित्सा (Vishachikitsa) में समृद्ध परंपरा थी, जिससे उनमें इस विज्ञान के प्रति गहरी रुचि विकसित हुई। उनके परदादा श्री अग्नि शर्मा, जो उनके प्रथम आयुर्वेद शिक्षक थे, ने उन्हें विषचिकित्सा और “मंत्रचिकित्सा” सीखने के लिए प्रेरित किया और उनके जीवन तथा अध्ययन पर गहरा प्रभाव डाला।

  1. आयुर्वेदादिस्थानात्वांगल (आयुर्वेद के मूल सिद्धांत)। यह पुस्तक आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों को सरल भाषा में स्पष्ट रूप से समझाती है।
  2. वर्ष 1961 में ममगलोडयम प्रिंटर द्वारा प्रकाशित "विष वैद्य सार सम्मुच्यम्" का संपादन। विष वैद्य सार सम्मुच्यम् केरल के विष वैद्यों द्वारा विष विज्ञान पर आधारित एक लोकप्रिय और व्यापक रूप से प्रचलित ग्रंथ है। इस पुस्तक में सरल और प्रभावी सूत्रीकरण और उपचार सिद्धांत दिए गए हैं।  

 

HI