डॉ. सीतीकान्त दास
जन्म तिथि :- 25 सितम्बर, 1936
जन्म स्थान :- सुनहट, बालासोर जिला, ओडिशा, भारत
व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विवरण:- डॉ. सीतीकान्त दास एक प्रतिष्ठित परिवार से थे। उनके पिता, कबीराज लम्बोदर दास, एक विख्यात आयुर्वेदिक चिकित्सक होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया। उनकी माता, नारायणी दास, के नाम पर ही उनके पिता के आयुर्वेदिक औषधालय का नाम “नारायणी औषधालय” रखा गया था। डॉ. दास के पुत्र, डॉ. शांतनु दास, आज भी परिवार की आयुर्वेदिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
शैक्षिक योग्यताएँ :-
डॉ. दास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा मणि चरण विद्यापीठ से प्राप्त की और माध्यमिक शिक्षा बालासोर जिला विद्यालय, ओडिशा से पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने आयुर्वेद का अध्ययन किया। 1956 में उन्होंने श्री बैद्यनाथ विज्ञान विद्यालय, वाराणसी से आयुर्वेदाचार्य डिप्लोमा अर्जित किया। इसके पश्चात उन्होंने कलकत्ता स्थित एस.एफ.एम.ए.एस.एफ. से आयुर्वेद तीर्थ एवं आयुर्वेदाचार्य की स्नातक उपाधि प्राप्त की। उन्होंने जे.बी. रॉय स्टेट आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, कलकत्ता में सीनियर हाउस मैन के रूप में इंटर्नशिप भी की।
व्यावसायिक यात्रा:-
· प्रारंभिक करियर:-
डॉ. सीतीकान्त दास ने अपने करियर की शुरुआत जे.बी. रॉय स्टेट आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, कलकत्ता में सीनियर हाउस मैन के रूप में की। इसके बाद उन्होंने ओडिशा के बालासोर में अपना क्लिनिकल प्रैक्टिस प्रारम्भ किया, जहाँ वे आयुर्वेदिक उपचार में विशेषज्ञ बने।
· संस्थापक सदस्य:-
डॉ. दास कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण रहे। इनमें ओडिशा का मयूरभंज आयुर्वेद महाविद्यालय, सुनहट (बालासोर) का बलांगी डिग्री कॉलेज तथा व्यास विहार एजुकेशन फाउंडेशन (जो आगे चलकर फकीर मोहन विश्वविद्यालय बना) प्रमुख हैं।
· संस्थागत योगदान:-
1988 में डॉ. दास ने अपनी स्वयं की औषधशाला नारायणी फार्मेसी की स्थापना की, जहाँ मकरध्वज वटी और मुक्त रसायन जैसी प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधियाँ निर्मित की गईं। 1994 में उन्होंने “बैद्य विचार संगोष्ठी” का आयोजन किया, जिससे आयुर्वेदिक चिकित्सकों में सहयोग की भावना को बढ़ावा मिला।
· क्लिनिकल उपलब्धियाँ:-
डॉ. दास नाड़ी परीक्षा (पल्स डायग्नोसिस) में अपनी विशेषज्ञता तथा शास्त्रीय आयुर्वेदिक पद्धतियों द्वारा नवीन उपचारों के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी उल्लेखनीय चिकित्सीय उपलब्धियों में पेप्टिक अल्सर का सफल उपचार तथा पोलियो से रोगमुक्ति हेतु आयुर्वेदिक चिकित्सा का प्रयोग शामिल है।
साहित्यिक योगदान:-
डॉ. सीतीकान्त दास को साहित्य से गहरा लगाव था, विशेषकर ओड़िया और बांग्ला साहित्य से। यद्यपि वे मुख्य रूप से आयुर्वेद के क्षेत्र में प्रसिद्ध थे, लेकिन साहित्य लेखन और चर्चाओं में भी उनकी गहरी रुचि रही। उन्होंने उभरते लेखकों को प्रोत्साहित किया और क्षेत्रीय साहित्य के संरक्षण व संवर्धन में योगदान दिया। यद्यपि उन्होंने स्वयं कोई बड़ी कृति नहीं लिखी, किन्तु साहित्यिक समुदाय पर उनका प्रभाव और सहयोग उनकी विरासत का अमूल्य अंग है।
पुरस्कार और सम्मान:-
आयुर्वेद और समाज में उनके योगदान के लिए डॉ. दास को अनेक सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 2007 में, उन्हें ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक द्वारा अखिल भारतीय आयुर्वेद कांग्रेस के शताब्दी समारोह में “पियूष पानी सम्मान” से अलंकृत किया गया। वर्ष 2006 में कनिका फाउंडेशन द्वारा “सिद्ध विद्य सम्मान” प्राप्त हुआ। 1994 में गोपबंधु आयुर्वेद महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में उन्हें “गोल्डन जुबिली अवार्ड” प्रदान किया गया। “पॉपुलर डॉक्टर्स अवार्ड” उनके रोगियों और समाज में उनकी प्रतिष्ठा के लिए दिया गया। 2006 में, बालासोर जिला विद्यालय द्वारा उन्हें “छात्र स्मृति सम्मान” से सम्मानित किया गया।



























































