कविराज लक्ष्मण मिश्रा

जन्म तिथि :- 21 जनवरी, 1900  

जन्म स्थान :- बिराप्रतापपुर सासन, पुरी ज़िला, ओडिशा, भारत

कविराज लक्ष्मण मिश्र ओडिशा, भारत में आयुर्वेद के क्षेत्र की एक प्रमुख हस्ती थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन प्रदेश के निम्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले रोगियों की सेवा को समर्पित किया। उनका जन्म जनवरी 1900 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सत्यवादी वन विद्यालय में प्राप्त की, जो नैतिक मूल्यों और औपचारिक शिक्षा पर विशेष बल देने के लिए प्रसिद्ध था। कविराज लक्ष्मण मिश्र ने उच्च शिक्षा कटक स्थित रेवेंशॉ कॉलेज से प्राप्त की और ब्रिटिश शासनकाल में ओडिशा पुलिस विभाग में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। किंतु उनका गहरा झुकाव आयुर्वेद की ओर तथा जनजातीय समुदायों द्वारा प्रयुक्त औषधीय जड़ी-बूटियों के उपचारात्मक गुणों के प्रति आकर्षण ने उन्हें परंपरागत हर्बल चिकित्सा के अनुसंधान और प्रसार हेतु प्रेरित किया, ताकि साधारण लोग इसका लाभ उठा सकें। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के उपरांत उन्होंने ओड़िया भाषा में अनेक ग्रंथों का लेखन किया, जिनमें विभिन्न रोगों तथा उनके आयुर्वेदिक उपचारों का उल्लेख है। अपने व्यापक अनुभव और परीक्षित औषधीय योगों के आधार पर उन्होंने स्वयं की औषधशाला की स्थापना की। उनकी विरासत उनके पुत्र स्व. कविराज गणेश मिश्र तथा उनकी पत्नी डॉ. श्रीमती शैलबाला देवी द्वारा आगे बढ़ाई गई, जो वर्तमान में पुरी स्थित अपने आवास से उपचार प्रदान कर रही हैं। आयुर्वेद में योगदान के अतिरिक्त कविराज लक्ष्मण मिश्र ने श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी की मंदिर प्रशासन व्यवस्था में भी महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका निभाई। वे गोपबंधु आयुर्वेद महाविद्यालय की शासी निकाय परिषद के अध्यक्ष तथा समंत चंद्र शेखर कॉलेज, पुरी की शासी निकाय परिषद के अध्यक्ष भी रहे। उनके प्रभावशाली कार्यों की मान्यता स्वरूप वर्ष 1987 में निखिल उत्कल आयुर्वेद वैद्य सम्मिलनी ने उन्हें “आयुर्वेद शिरोमणि” की उपाधि से सम्मानित किया। एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने वंचित वर्गों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने हेतु निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का भी आयोजन किया।

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https://journals.lww.com/jras/fulltext/2024/08002/kabiraj_laxman_mishra__a_pioneer_of_ayurveda_and.27.aspx
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